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Showing posts from August, 2019

सोचती हूं बचपन ही अच्छा था

जब देखती हूं मुड़कर पुरानी उन तस्वीरों को, सोचती हूं बचपन ही अच्छा था। भोला था, भला था और मन का सच्चा था, आज की तरह न मेरा मन इतना पक्का था, सोचती हूं बचपन ही अच्छा था।। लगती थी चोट शरीर पर , दिल पर चोट का न कोई थक्का था, माँ की डांट में प्यार और पिता के इंकार में भी संसार दीखता था, जब देखती हूं आज मुड़कर पुरानी उन तस्वीरों को , सोचती हूं बचपन ही अच्छा था ।। स्कूल का वो दस किलो का भारी बस्ता भी, आज की जिम्मेदारियों से हल्का लगता था, जब हो जाती थी बिजली यूंही बेटाइम गुल, बिजली के जाने पर भी न अंधकार दीखता था, जब देखती हूं आज मुड़कर पुरानी उन तस्वीरों को, सोचती हूं बचपन ही अच्छा था।। माँ जो देती कुछ भी लंच के डिब्बे में, वो सादा खाना भी पकवान से कम न लगता था, जो छोटे भाई पर छोड़ा हाथ भी तो, उसका सम्मान भी न डिगता था।। वो परीक्षाओं का लंबा चौड़ा निबंध भी, बिलकुल न लम्बा लगता था, जब देखती हूं आज मुड़कर पुरानी उन तस्वीरों को, सोचती हूं बचपन ही अच्छा था ।। झुककर करना नमस्कार बड़ो को, ये कभी न हमको खलता था, जो देख न पाए जुड़े हाथों को तो, नज़रअंदाज़ होना न बुरा लगता था।। जब देखती हूं आज मुड़कर पुरानी उ...

जवान की जुबानी

हे प्रभु तेरी है ये कैसी माया, मदहोश युवा को असीमित आज़ादी और देश की रक्षा करने वाले के सर पर मौत का साया, आज देने को अपने खून का एक कतरा भी, जिनका मन सोच न पाया, किसी गूदड़ी के लाल ने इस देश के गद्दारो पर भी, अपनी जान न्योछावर करने का मन बनाया, जब-जब हर रात तुमने अपने बच्चो के सर पर ममता भरा हाथ फेहराया , हर उस पल में किसी के लाल की आखिरी साँसों ने दोहराया, ऐ भूल न जाना मेरे वतन वालो, तुम्हे सुख की नींद सुलाने के लिए मैंने अपनी माँ का दिल है दुखलाया, इस देश में शोना-बाबू के नाम पर जान देने / लेने वालो को ये एक पल समझ न आया, तुम जिसे समझते सस्ती , उस जान की रक्षा करने के लिए मैंने अपना सर कटवाया, हज़ारो सुइओ सी चुभती उस कड़क ठण्ड में  भी मुझे एक पल चैन न आया, देके दगा अपने वतन को तुमने मेरे बलिदान को है गवाया, आज़ादी के नाम पर तुम लोगो का एक बाल भी ना कुछ कर पाया, तुम लोगो की खातिर मैं अपने दूधमुहे बच्चे का चेहरा भी देख ना पाया, न जाने कितने स्वार्थी नेताओ और बुद्धिजीविओ ने, इस देश की भोली जनता को धर्म, जाती और छेत्रवाद के नाम पर बरगलाया, पर जो तुम भूजो तो ...